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ग्राम पंचायत सेखवा में फर्जीवाड़े का खेल! सचिव नेटवर्क मार्केटिंग में व्यस्त, सरपंच के साथ मिलकर हार्डवेयर दुकान से ‘सेव-बूँदी’ का बिल पास…Part-02

मिथलेश आयम, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(खबरो का राजा) : जिले की ग्राम पंचायत सेखवा में भ्रष्टाचार और लापरवाही का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सूत्र बताते है पंचायत सचिव जहां सरकारी कार्यों की जगह हर्बल लाइफ नेटवर्क मार्केटिंग जैसे निजी व्यापार में व्यस्त हैं, न फ़ोन उठाते न ही पंचायत आते है, जिसे सरपंच के साथ उनकी मिलीभगत से फर्जी बिल पास कर सरकारी राशि के दुरुपयोग का खेल खुलेआम चल रहा है। मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम पंचायत सेखवा के नाम पर साहू हार्डवेयर कोटमी की एक बिल कॉपी सामने आई। बिल में दिनांक 18 अगस्त 2025 दर्ज है, और इसमें सेव (60 किलो @200 रुपए = ₹12,000) तथा बूँदी (48 किलो @180 रुपए = ₹8,640) की आपूर्ति दर्शाई गई है। कुल ₹20,640 का यह बिल ग्राम पंचायत सेखवा के लिए जारी किया गया है, जिस पर सरपंच और सचिव दोनों के हस्ताक्षर मौजूद हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि साहू हार्डवेयर कोटमी एक ऐसी दुकान है जो सीमेंट, रेत, गिट्टी, लोहे की छड़ और मशीनी पार्ट्स की बिक्री करती है। उस दुकान से सेव-बूँदी जैसी खाद्य सामग्री कैसे खरीदी गई, यह स्वयं में भ्रष्टाचार की गवाही देता है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरा बिल फर्जी है और इसका उद्देश्य सिर्फ सरकारी राशि का गबन करना है। ग्राम पंचायत के कई कार्य पहले से ही ठप पड़े हुए हैं। सचिव का ध्यान गांव के विकास कार्यों की जगह हर्बल लाइफ जैसे नेटवर्क मार्केटिंग में लगा हुआ है। वह आए दिन उत्पाद बेचने और नए सदस्यों को जोड़ने में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में पंचायत के प्रशासनिक कार्य भगवान भरोसे चल रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कई बार सचिव के खिलाफ शिकायतें दी गईं, लेकिन उच्च अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। सरपंच और सचिव की मिलकर योजनाओं की राशि का मनमाना उपयोग कर रही है। कई कामों का भुगतान बिना कार्य पूर्ण किए ही कर दिया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह “सेव-बूँदी वाला बिल” तो बस एक उदाहरण है ऐसे कई और भुगतान संदिग्ध तरीके से किए गए हैं। विकास के नाम पर पंचायत में भ्रष्टाचार का बोलबाला है, और अधिकारी भी इस पर आंखें मूंदे बैठे हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनपद अधिकारियों से मांग की है कि ग्राम पंचायत सेखवा के सचिव और सरपंच दोनों के खिलाफ कड़ी जांच की जाए तथा पूरे वित्तीय लेन-देन का ऑडिट कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जब अधिकारी और कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी छोड़कर निजी लाभ के पीछे भागेंगे, तो गांव का विकास कैसे संभव होगा? यह मामला केवल ग्राम पंचायत सेखवा का नहीं है, बल्कि यह पूरे पंचायती तंत्र में व्याप्त लापरवाही और भ्रष्टाचार की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। जरूरत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेकर सख्त कार्रवाई करे, ताकि भविष्य में इस तरह की मनमानी करने वालों को सबक मिले और पंचायत व्यवस्था को पुनः पारदर्शी बनाया जा सके।

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